नई दिल्ली | लोकसभा में मंगलवार को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) — या VB-G RAM G — बिल , 2025 को पेश किए जाने के बाद तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह विधेयक वर्ष 2005 के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाने का प्रस्ताव करता है।
कई विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि यह विधेयक MGNREGA से महात्मा गांधी का नाम हटाने का प्रयास है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नया बिल देश के लिए “गंभीर रूप से दुर्भाग्यपूर्ण और प्रतिगामी कदम” है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस द्वारा पहले जवाहर रोजगार योजना का नाम बदलना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का अपमान था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार न केवल महात्मा गांधी में विश्वास रखती है, बल्कि उनके सिद्धांतों का पालन भी करती है।
“महात्मा गांधी जी हमारे दिलों में बसते हैं,” चौहान ने कहा। उन्होंने आगे जोड़ा, “महात्मा गांधी जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय दोनों ने ही समाज के सबसे वंचित वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया था। हम उनके विचारों में विश्वास रखते हैं और उन्हीं के आधार पर गरीबी उन्मूलन की कई योजनाएं लागू कर रहे हैं।”
VB-G RAM G बिल का उद्देश्य MGNREGA की जगह लेकर भारत की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना है। इस बिल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक श्रम के लिए स्वेच्छा से काम करने वाले वयस्क परिवार सदस्यों को प्रति वित्त वर्ष मिलने वाले गारंटीकृत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का प्रावधान है।
विपक्ष ने राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को लेकर भी चिंता जताई। MGNREGA के तहत जहां अधिकांश खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, वहीं नया बिल मजदूरी और क्रियान्वयन लागत का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों पर डालता है।
