मोहाली | पंजाब के मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर रोग (एडी) के उपचार की संभावना वाला एक नया चिकित्सीय मार्ग खोजा है। यह शोध नैनोकणों पर आधारित है, जिनमें ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले एक पॉलीफेनॉल, एक न्यूरोट्रांसमीटर और एक अमीनो एसिड को एकीकृत किया गया है।
मंगलवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि यह तरीका रोग की प्रगति की दिशा को बदल सकता है, उसे धीमा कर सकता है, याददाश्त में सुधार ला सकता है और संज्ञानात्मक कार्यों को सहारा दे सकता है।
इस थेरेपी में ग्रीन टी में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी), मूड से जुड़े महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर डोपामिन और कई कोशिकीय कार्यों में शामिल अमीनो एसिड ट्रिप्टोफैन को ईजीसीजी–डोपामिन–ट्रिप्टोफैन नैनोकणों (ईडीटीएनपी) के रूप में एक साथ जोड़ा गया है।
प्रयोगशाला परीक्षणों और चूहे के मॉडल में इन नैनोकणों ने विषैले प्लाक्स को तोड़ा, सूजन को कम किया, मस्तिष्क कोशिकाओं के भीतर संतुलन बहाल किया और स्मृति व सीखने की क्षमता में सुधार किया। कंप्यूटर सिमुलेशन से भी पुष्टि हुई कि ये नैनोकण हानिकारक Aβ फाइब्रिल्स से जुड़कर उन्हें आणविक स्तर पर अलग कर देते हैं।
अल्जाइमर रोग वैश्विक स्तर पर एक बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौती है। जैसे-जैसे आबादी की उम्र बढ़ रही है, यह बीमारी रोगियों की देखभाल और आर्थिक बोझ के लिहाज से गंभीर चुनौतियां पैदा कर रही है, जिससे प्रभावी उपचार और रोकथाम की रणनीतियों की आवश्यकता और भी अधिक रेखांकित होती है।
