जोहान्सबर्ग । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि AI के युग में हमें अपने दृष्टिकोण को “आज की नौकरियों” से “कल की क्षमताओं” की ओर तेजी से मोड़ने की आवश्यकता है।
वे दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में G20 सम्मेलन के दौरान “सभी के लिए न्यायसंगत और समावेशी भविष्य – क्रिटिकल मिनरल्स; सम्मानजनक कार्य; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” शीर्षक वाले सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के तरीके में मूलभूत बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि ये प्रौद्योगिकियाँ वित्त-केंद्रित नहीं बल्कि मानव-केंद्रित हों, राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक हों, और एक्सक्लूसिव सिस्टम के बजाय ओपन-सोर्स मॉडल पर आधारित हों।
उन्होंने बताया कि इस दृष्टि को भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में समाहित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष अनुप्रयोगों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल पेमेंट्स में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जहाँ भारत वैश्विक अग्रणी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विषय में प्रधानमंत्री ने भारत की रणनीति को समान अवसर, बड़े पैमाने पर स्किलिंग और जिम्मेदार उपयोग पर आधारित बताया।
उन्होंने कहा कि भारत फरवरी 2026 में “सर्वजनम् हिताय, सर्वजनम् सुखाय” (सभी के हित के लिए, सभी के सुख के लिए) थीम के साथ AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा और सभी G20 देशों को इसमें शामिल होने का आमंत्रण दिया।
