नई दिल्ली | उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने मंगलवार को अपने कार्यपत्र के भाग 1 को प्रकाशित किया, जिसमें जनरेटिव आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट कानून के अंतर्संबंध की जांच की गई है।
कार्यपत्र मौजूदा दृष्टिकोणों का आकलन करता है, जिनमें blanket छूट, opt-out अधिकार के साथ या बिना टेक्स्ट और डेटा माइनिंग अपवाद, स्वैच्छिक लाइसेंसिंग और विस्तारित सामूहिक लाइसेंसिंग शामिल हैं।
यह एक नई नीतिगत रूपरेखा का प्रस्ताव करता है, जिसका उद्देश्य सामग्री निर्माताओं और AI नवोन्मेषकों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
शून्य-कीमत लाइसेंस मॉडल को खारिज करते हुए, समिति का तर्क है कि ऐसा दृष्टिकोण मानव रचनात्मकता के प्रोत्साहन को कमजोर कर देगा और मानव-निर्मित सामग्री के दीर्घकालिक कम उत्पादन का कारण बन सकता है।
एक विकल्प के रूप में, समिति एक हाइब्रिड मॉडल का प्रस्ताव करती है, जिसके तहत:
- AI डेवलपर्स को सभी विधिपूर्वक उपलब्ध सामग्री के प्रशिक्षण उद्देश्य से उपयोग के लिए blanket लाइसेंस मिलेगा, जिसके लिए व्यक्तिगत बातचीत की आवश्यकता नहीं होगी।
- AI उपकरणों के व्यावसायीकरण पर ही रॉयल्टी देय होगी, जिसकी दरें सरकार द्वारा नियुक्त समिति तय करेगी और वे न्यायिक समीक्षा के अधीन होंगी।
- एक केंद्रीकृत तंत्र रॉयल्टी के संग्रह और वितरण को संभालेगा, जिसका उद्देश्य लेनदेन लागत को कम करना, कानूनी स्पष्टता प्रदान करना और बड़े तथा छोटे दोनों प्रकार के AI डेवलपर्स के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
