Sunday, March 22

नई दिल्ली | रविवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी)  बिल, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है।

यह अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 का स्थान लेगा और आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से एक आधुनिक वैधानिक ढांचा प्रदान करेगा।

यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम (unskilled manual work) करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हैं, कम से कम 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है।

बुवाई और कटाई के मुख्य मौसम के दौरान कृषि श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, यह अधिनियम राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों तक की कुल ‘विराम अवधि’ (pause period) को अधिसूचित करने का अधिकार देता है।

यह अधिनियम साप्ताहिक आधार पर, या किसी भी स्थिति में काम पूरा होने के पंद्रह दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान अनिवार्य करता है।

यह पहले के अपात्रता प्रावधानों (dis-entitlement provisions) को हटाता है और बेरोजगारी भत्ते को एक सार्थक वैधानिक सुरक्षा उपाय के रूप में बहाल करता है। जहां निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है, वहां पंद्रह दिनों के बाद बेरोजगारी भत्ता देय हो जाता है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का पारित होना भारत के ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे के एक महत्वपूर्ण नवीनीकरण का प्रतिनिधित्व करता है।

 

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