गोवा । रविवार को अंतरराष्ट्रीय पर्पल फेस्ट में दिव्यांगजनों की सुनने, पढ़ने और लिखने की क्षमता को सुलभ बनाने के उद्देश्य से तीन परिवर्तनकारी पहलों की शुरुआत की गई। ये पहलें दिव्यांगजनों के समावेशी शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
पहली प्रमुख पहल के रूप में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आईईएलटीएस प्रशिक्षण पुस्तिका (IELTS Training Handbook for Persons with Disabilities) जारी की गई।
यह पुस्तिका अपनी तरह का पहला समावेशी संसाधन है, जिसे आईईएलटीएस परीक्षा की तैयारी को दिव्यांगजनों के लिए सुगम, संरचित और शिक्षार्थी-मित्र बनाने के लिए तैयार किया गया है।
यह प्रकाशन स्वाध्ययन मार्गदर्शिका के साथ-साथ प्रशिक्षकों के लिए शिक्षण पुस्तिका के रूप में भी कार्य करेगा, और दृष्टि, श्रवण, गतिशीलता तथा अन्य प्रकार की दिव्यांगताओं से ग्रस्त व्यक्तियों को मानक आईईएलटीएस संसाधनों तक पहुंच में आने वाली चुनौतियों का समाधान करेगा।
भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC), जो दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत कार्यरत है, ने दो पहले शुरू की।
पहली पहल के तहत, केंद्र ने 11 से 29 अगस्त, 2025 के बीच पूर्व शिक्षण की मान्यता (RPL) के अंतर्गत सांकेतिक भाषा व्याख्या प्रमाणन (CISLI) / SODA और CODA के लिए कौशल पाठ्यक्रम का सफल आयोजन किया। कुल 17 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया और सभी उत्तीर्ण हुए। प्रमाणपत्रों का वितरण 3 दिसंबर, 2025, जो कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस है, पर किया जाएगा।
दूसरी पहल के तहत, ISLRTC ने अमेरिकन सांकेतिक भाषा (ASL) और ब्रिटिश सांकेतिक भाषा (BSL) पर एक विशेषीकृत बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
यह एक एक महीने का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण कोर्स होगा, जो 3 दिसंबर, 2025 से प्रारंभ होगा। इसका उद्देश्य भारतीय दुभाषियों को अंतरराष्ट्रीय exposure प्रदान करना और उनके व्यावसायिक अवसरों का विस्तार करना है।


