अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो टूक कहा कि जब तक भारत और अमेरिका के बीच Tariff विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक नई ट्रेड डील पर कोई वार्ता नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर कुल 50% आयात शुल्क लागू किया है।
50% टैरिफ का कारण: रूसी तेल आयात पर आपत्ति
अमेरिका ने 30 जुलाई को 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जो 7 अगस्त से लागू हो चुका है। इसके बाद 6 अगस्त को एक और आदेश के तहत 25% और बढ़ा दिया गया, जो 27 अगस्त से प्रभावी होगा। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और इसका लाभ रूस यूक्रेन युद्ध में ले रहा है।
विदेश विभाग ने जताया भरोसा, संवाद जारी रखने का वादा
अमेरिकी विदेश विभाग ने 7 अगस्त को बयान जारी करते हुए भारत को “रणनीतिक साझेदार” बताया। विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि टैरिफ और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं, लेकिन इन्हें सीधी बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए सुलझाया जा सकता है।
आगे की राह: तनाव और सहयोग के बीच संतुलन
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह टकराव भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए एक अहम मोड़ है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर कायम है, जबकि अमेरिका व्यापार संतुलन और भू-राजनीतिक दबावों पर फोकस कर रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश विवाद सुलझाकर नए अवसरों की ओर बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है।
