तिरुवनंतपुरम । नीति आयोग ने रविवार को एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि उसने शोध और विकास (आर एंड डी) को सुगमता से संचालित करने के लिए मार्गदर्शक दृष्टिकोण के रूप में ROPE फ्रेमवर्क — Removing Obstacles, Promoting Enablers (अवरोधों को हटाना, सक्षम तंत्र को बढ़ावा देना) — पेश किया है।
यह फ्रेमवर्क तिरुवनंतपुरम स्थित नेशनल सेंटर फॉर अर्थ साइंस स्टडीज (एनसीईएसएस) में आयोजित “शोध और विकास को सुगमता से संचालित करने” पर क्षेत्रीय परामर्श बैठक के दौरान प्रस्तुत किया गया।
प्रो. विवेक कुमार सिंह ने बताया कि यह फ्रेमवर्क शोधकर्ताओं के सामने आने वाली संस्थागत और नीतिगत चुनौतियों की पहचान करने के साथ-साथ लचीलापन, अंतर-संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे सहयोगी तंत्रों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, ताकि वैज्ञानिक प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा सके।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने शोध की दक्षता और प्रभाव बढ़ाने के लिए ठोस सुझाव दिए। उन्होंने सेवानिवृत्त वैज्ञानिक प्रतिभा का उपयोग करने, विश्वविद्यालय-उद्योग-सरकार (यूआईजी) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, संस्थानों के बीच डेटा साझाकरण को बढ़ावा देने और विज्ञान संचार में सुधार लाने की सिफारिश की, ताकि शोध परिणाम समाज के लिए अधिक प्रासंगिक बन सकें।
केरल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कहा कि “शोध और विकास की सुगमता” नागरिकों के जीवन की सुगमता से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जन-केंद्रित विकास के साथ संरेखित होना चाहिए और संस्थानों, उद्योगों तथा सरकारों के बीच सहयोग समावेशी विकास की कुंजी है।
राज्यपाल ने कहा, “राज्य का विकास ही राष्ट्र के विकास का मार्ग है,” और क्षेत्रीय स्तर पर नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।


