Wednesday, February 4

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारी और रिलायंस पावर लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अशोक कुमार पाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

उद्योगपति अंबानी के करीबी सहयोगी पाल को एडीए समूह से जुड़ी फर्जी बैंक गारंटी मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

एडीए मामले में यस बैंक और एडीए समूह की कंपनियों पर वित्तीय घोटाले के आरोप हैं, जिसकी कमान पहले अनिल अंबानी के हाथ में थी।

ईडी ने आरोप लगाया था कि अनिल अंबानी और उनके रिलायंस समूह की संस्थाएं 17,000 करोड़ रुपए के अधिक की लोन धोखाधड़ी मामले में शामिल थीं।

ईडी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एक प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत संभावित उल्लंघनों की जांच कर रहा है।

सरकारी जांच एजेंसी संदेह है कि 2017 और 2019 के बीच यस बैंक द्वारा वितरित लगभग 3,000 करोड़ रुपए के लोन का दुरुपयोग किया गया था।

सरकारी एजेंसी ने दावा किया है कि पाल ने कंपनी के पैसे को डायवर्ट करने और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) को 68 करोड़ रुपए से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने में अहम भूमिका निभाई।

जुलाई में एक बड़े अभियान में, ईडी ने रिलायंस समूह से जुड़े 35 परिसरों की तलाशी ली, जिसमें 50 से अधिक कंपनियों और 25 व्यक्तियों को निशाना बनाया गया, जिनके इस मामले से जुड़े होने का अनुमान है।

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियों के शेयरों में बीते एक महीने में भारी गिरावट देखी गई।

इस दौरान एनएसई पर रिलायंस पावर का शेयर 6.13 प्रतिशत गिरकर 44.99 रुपए पर पहुंच गया है, जबकि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर भी गिरावट आई और 12.06 प्रतिशत गिरकर 229 रुपए पर पहुंच गए हैं।

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