नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को एक सामूहिक कार्ययोजना बनाने की अपील की, जो सौर ऊर्जा को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़ती हो।
मुर्मू ने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की आठवीं सत्रीय सभा के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा, “हमारा अनुभव यह दर्शाता है कि जब हमने सबसे दूरस्थ क्षेत्रों के घरों को रोशन किया, तो इसने हमारे इस विश्वास को और मजबूत किया कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की नींव है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और बिजली आपूर्ति से कहीं आगे अवसरों के द्वार खोलती है।”
उन्होंने कहा, “हमारी प्रगति को केवल मेगावाट में नहीं, बल्कि रोशन हुए जीवनों की संख्या, सशक्त हुए परिवारों की संख्या और परिवर्तित हुई समुदायों की संख्या से भी मापा जाना चाहिए।”
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि जब हम बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों का विस्तार कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बना रहे, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने का मुख्य कारण है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है और इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में दृढ़तापूर्वक कदम उठा रहा है।


