थिम्फू (भूटान) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भूटान के चौथे राजा महामहिम जिग्मे सिंगे वांगचुक के 70वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए भारत और भूटान के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित किया।
मोदी ने कहा कि वे भूटान एक भारी मन से आए हैं, क्योंकि पिछली रात दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभी को गहराई से विचलित कर दिया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्राचीन आदर्श ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ — पूरी दुनिया एक परिवार है — से प्रेरणा लेता है। उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ मंत्र के माध्यम से सार्वभौमिक सुख-शांति की कामना दोहराई और वैदिक श्लोकों का उल्लेख किया, जो आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधि, वनस्पति और सभी प्राणियों में शांति की प्रार्थना करते हैं।
उन्होंने कहा कि इन्हीं भावनाओं के साथ भारत भूटान के साथ ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल में सहभागी बन रहा है, जहां दुनिया भर के संत और आध्यात्मिक नेता वैश्विक शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, और 140 करोड़ भारतीयों की प्रार्थनाएं भी इस सामूहिक भावना का हिस्सा हैं।
मोदी ने कहा कि भूटान के चौथे राजा महामहिम जिग्मे सिंगे वांगचुक ने भारत और भूटान की मित्रता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा रखी गई नींव आज भी दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को पोषित कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-भूटान संबंधों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों के लोगों के बीच का गहरा भावनात्मक संबंध है।


