Sunday, March 22

नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर रही है। आईएस आतंकियों को पाकिस्तानी सेना न केवल हथियार मुहैया करा रही है, बल्कि आतंकी संगठन के कमांडरों को स्पेशल ट्रेनिंग देने का काम भी कर रही है।

पाकिस्तान का मकसद अपने पड़ोसियों के खिलाफ आईएसआई आतंकियों का इस्तेमाल करना है।

इसके लिए पाकिस्तान ने चार शिविर स्थापित किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान धीरे-धीरे इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) के कुछ आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ सकता है।

डूरंड रेखा को लेकर अफगान तालिबान के साथ तनाव बढ़ने के बाद से, पाकिस्तान और आईएसकेपी के आतंकवादियों के बीच बीते कुछ समय में नजदीकी बढ़ी है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले भी किए हैं और तालिबान ने भी इसका कड़ा जवाब दिया।

हाल के महीनों में, पाकिस्तान में खास तौर से आईएसकेपी के आतंकियों को प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनिंग कैंप की संख्या बढ़ाई है।

खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई अफगान तालिबान पर हमले करने के इरादे से आईएसकेपी के 1,000 से ज्यादा आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रही है। वहीं भारतीय एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों को अलग-अलग प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

आतंकवादियों को जमीन पर लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे तालिबान लड़ाकों का सामना कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मघाती हमलावरों के लिए भी प्रशिक्षण शिविर हैं। पाकिस्तानी सेना के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारी, इस प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल हैं।

आईएसकेपी जब से अस्तित्व में आया है, तब से वह तालिबान के साथ संघर्षरत है। आईएसकेपी का मकसद अफगानिस्तान से तालिबान शासन को उखाड़ फेंककर शासन करने का है। विशेषज्ञों की मानें तो आईएसकेपी के कई सदस्यों को अफगानिस्तान से पाकिस्तान लाया जा रहा है और फिर उन्हें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के कबायली इलाकों में स्थित कैंपों में भेजा जा रहा है।

अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने मोहम्मद नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। मोहम्मद की गिरफ्तारी से इस दावे की पुष्टि हो गई कि पाकिस्तान आईएसकेपी आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र बन गया है।

हिरासत में लिए गए आतंकवादी ने सुरक्षा अधिकारियों को बताया कि उसने पाकिस्तान के क्वेटा में युद्ध प्रशिक्षण लिया था। जब वह फर्जी पहचान पत्र के साथ अफगानिस्तान में दाखिल हुआ था, तब उसका नाम मोहम्मद था। आईएसआई ने उसे अपने विचारों से प्रभावित करने के लिए काफी प्रयास किए थे।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल आईएसकेपी का पूरा फोकस अफगानिस्तान पर है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इसका पूरे क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

आईएसकेपी की नजर भारत पर भी है और आने वाले समय में अफगानिस्तान से बाहर भी अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर सकता है।

जब आईएसकेपी की स्थापना हुई थी, तब उसका फोकस तालिबान को हराना था, हालांकि उसने यह भी साफ कर दिया था कि वह एक खिलाफत स्थापित करने में रुचि रखता है जिसमें भारत भी शामिल हो। इस आतंकी समूह ने जम्मू-कश्मीर में तनाव पैदा करने में काफी रुचि दिखाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान धीरे-धीरे आईएसकेपी के कुछ आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर भेज सकता है। आईएसआई को लगता है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के अलावा घाटी में एक और आतंकी समूह होने से उनकी लड़ाई और मजबूत हो जाएगी।

जिस तरह से पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठनों के साथ खुलकर प्रशिक्षण का काम कर रहा है, इससे भारतीय एजेंसियों के लिए एक और चिंता जरूर बढ़ गई है।

अटकलें लगाई जा रही है कि आईएसकेपी सीमा से सटे इलाकों से भारतीय युवाओं को टारगेट करेगा और उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजेगा।

हाल ही में हुई गणना के अनुसार, केरल के कम से कम 21 लोग देश छोड़कर अफगानिस्तान में आईएसकेपी में शामिल हो गए हैं। उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा था ताकि बाद में उन्हें भारत वापस भेजकर आतंकी हमले किए जा सकें।

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