नई दिल्ली । उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सोमवार को प्रस्ताव दिया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन बेचे जाने वाले पैक्ड उत्पादों के लिए ‘मूल देश’ (Country of Origin) के आधार पर खोजने और क्रमबद्ध करने योग्य फ़िल्टर उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाए।
इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना और ऑनलाइन खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ाना है। प्रस्तावित संशोधन का मकसद उपभोक्ताओं को यह सुविधा देना है कि वे खरीदारी करते समय आसानी से उत्पादों के मूल देश की पहचान कर सकें और सूचित निर्णय ले सकें।
यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को उत्पादों को उनके मूल देश के आधार पर खोजने और छांटने में सक्षम बनाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापक उत्पाद सूची में यह जानकारी ढूंढने में लगने वाला समय कम होगा।
यह संशोधन सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ पहलों के अनुरूप है, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अधिक आसानी से खोजा जा सकेगा।
इससे भारतीय निर्माताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे, घरेलू उत्पादों को आयातित वस्तुओं के साथ बराबरी की दृश्यता मिलेगी और उपभोक्ताओं को स्थानीय रूप से निर्मित विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
‘मूल देश’ फ़िल्टर की शुरुआत से अनुपालन की निगरानी, उत्पाद जानकारी की सत्यापन प्रक्रिया और उल्लंघनों की पहचान अधिक कुशलतापूर्वक की जा सकेगी, जिससे प्रत्येक उत्पाद सूची की मैनुअल जांच की आवश्यकता नहीं होगी।
विभाग ने मसौदा संशोधन नियमों को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित किया है और हितधारकों से सुझाव 22 नवंबर तक आमंत्रित किए हैं।
