Tuesday, March 24

नई दिल्ली । भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब देश और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि रेपो रेट में एक और कटौती, संभवतः 25 बेसिस पॉइंट (0.25%), की जा सकती है।

अगर यह कटौती होती है तो यह लगातार चौथी बार होगा जब आरबीआई ब्याज दरों में राहत देगा। इससे न सिर्फ बैंक लोन सस्ते होंगे, बल्कि ग्राहकों की EMI भी कम हो सकती है।

अब तक तीन बार हो चुकी है कटौती

वर्ष 2025 में अब तक तीन बार आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 1% की कटौती की है:

  • फरवरी 2025 में रेपो रेट को 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया।

  • अप्रैल 2025 में इसमें 0.25% की और कटौती की गई।

  • जून 2025 में तीसरी बार कटौती के बाद रेपो रेट 5.50% तक आ गया।

इस बार क्यों है कटौती की उम्मीद?

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल स्तर पर जारी टैरिफ वॉर, अमेरिका की अर्थव्यवस्था में गिरावट और भारत की GDP ग्रोथ पर दबाव के चलते रिजर्व बैंक को ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए एक और कटौती करनी पड़ सकती है।

रेपो रेट क्या है और इसका क्या असर होता है?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को RBI से कर्ज मिलता है।

  • जब RBI रेपो रेट कम करता है, तो बैंकों को कर्ज सस्ता पड़ता है।

  • बैंक इस लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, जिससे होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन पर ब्याज दरें कम हो जाती हैं।

  • नतीजतन, आम लोगों की EMI घटती है, जिससे उनकी खरीदारी क्षमता बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है।

EMI घटेगी, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को राहत

अगर रेपो रेट में और कटौती होती है, तो ग्राहकों को होम लोन और ऑटो लोन की EMI में 0.25% से 0.50% तक की राहत मिल सकती है। इसका सीधा असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी, नए घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी और बाजार में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

RBI पॉलिसी रेट में बदलाव क्यों करता है?

RBI का मुख्य उद्देश्य है महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक विकास को संतुलित रखना

  • जब महंगाई बढ़ती है, तो RBI पॉलिसी रेट बढ़ाकर मनी फ्लो को कम करता है।

  • जब इकोनॉमी स्लोडाउन में होती है, तो RBI रेट कम कर देता है ताकि बाजार में लिक्विडिटी बढ़े और लोग खर्च करें।

इस तरह, रेपो रेट एक नीतिगत हथियार (Policy Tool) है, जिससे सेंट्रल बैंक देश की आर्थिक दिशा तय करता है।

बुधवार को आएगा फैसला

तीन दिन तक चलने वाली MPC की बैठक के बाद 6 अगस्त (बुधवार) को RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा निर्णयों की घोषणा करेंगे।

अगर कटौती होती है, तो यह कदम उन करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा जो लोन की EMI चुका रहे हैं या नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं।

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