नई दिल्ली । भारत का सड़क नेटवर्क अब 63 लाख किलोमीटर से अधिक फैल चुका है, जिससे यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2013–14 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर अब 1,46,204 किलोमीटर हो गया है—जो लगभग 60 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है।
मंगलवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि केवल 2014 से 2025 के बीच ही देश में 54,917 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग जोड़े गए हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रगति को दर्शाती है, बल्कि इतने विशाल बुनियादी ढांचे के डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की बढ़ती आवश्यकता को भी उजागर करती है।
डिजिटल मैपिंग और स्थानिक इंटेलिजेंस अब राजमार्गों की योजना और विकास के तरीके को बदल रहे हैं। इस परिवर्तन के केंद्र में भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (Geographic Information System – GIS) और सरकार की प्रमुख पहल, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (NMP), के बीच की मजबूत समन्वय है।
भारत के राजमार्ग अब केवल परिवहन के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे परिवर्तन के इंजन बनते जा रहे हैं। जो मिशन पहले केवल शहरों को जोड़ने के लिए शुरू हुआ था, वह अब लोगों, डेटा और निर्णयों को जोड़ने वाले एक स्मार्ट, सतत और डिजिटल रूप से सशक्त बुनियादी ढांचे के नेटवर्क में बदल गया है।
GIS आधारित योजना, बुद्धिमान यातायात प्रणालियों, डिजिटल टोलिंग और नागरिक-केंद्रित अनुप्रयोगों के एकीकरण ने राजमार्ग नेटवर्क को एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र में बदल दिया है जो वास्तविक समय में महसूस करता है, प्रतिक्रिया देता है और सीखता है। प्रत्येक एक्सप्रेसवे अब न केवल संपर्क का माध्यम है बल्कि राष्ट्रीय बुद्धिमत्ता का एक केंद्र भी है—यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत में गतिशीलता केवल तेज़ ही नहीं, बल्कि अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और पारदर्शी भी हो।


