Sunday, March 22

नई दिल्ली । पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने शनिवार को अबू धाबी में आयोजित आईयूसीएन वर्ल्ड कंजरवेशन कांग्रेस 2025 में लोगों और पृथ्वी को केंद्र में रखने वाले भारत के सतत और प्रकृति-पोषक शहरी विकास के दृष्टिकोण को साझा किया।

सिंह ने कहा कि भारत द्वारा कार्बन बाज़ारों को प्रोत्साहित करने और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास ‘मिशन लाइफ’ के आह्वान को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का दृष्टिकोण एकीकृत योजना, विस्तारणीय मिशनों और नागरिक-केंद्रित व्यवहार परिवर्तन पर बल देता है।

मंत्री ने बताया कि सरकार देश के शहरों को तीन प्रमुख स्तंभों के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है:

  • हरित भवनों, ऊर्जा कोड और नगर वित्त के लिए सक्षम रूपरेखाएँ और मानक। 
  • वित्तपोषण और जोखिम-साझाकरण, जिसे केंद्रीय अनुदानों, लक्षित व्यवहार्यता-अंतर वित्तपोषण और नगर बॉन्ड बाज़ारों (जिसमें ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं) तक शहरों की पहुँच बढ़ाने के प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। 
  • क्षमता निर्माण और ज्ञान प्रणाली, जिनमें प्रशिक्षण, डेटा प्लेटफ़ॉर्म और स्मार्ट सिटीज़, अमृत एवं शहरी नियोजन सुधारों के अंतर्गत मॉडल परियोजनाएँ शामिल हैं। 

उन्होंने कहा कि भारत ने नीतिगत समर्थन, लक्षित योजनाओं और वित्तीय प्रोत्साहनों को मिलाकर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है।

उन्होंने भारत के कुछ राष्ट्रीय कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जैसे:

स्मार्ट सिटीज़ मिशन, जो 100 शहरों को कवर करता है, का उद्देश्य बिजली की खपत को कम करते हुए शहरी सेवाओं में सुधार करना है। ऊर्जा दक्ष भवन कोड यह सुनिश्चित करने में शहरों का मार्गदर्शन करते हैं कि नई निर्माण गतिविधियाँ जलवायु अनुकूल हों।

ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, जिसे 2022 में संशोधित किया गया था, भवनों, उपकरणों और उद्योगों के लिए ऊर्जा-दक्षता मानकों को सशक्त करता है तथा एक घरेलू कार्बन-क्रेडिट बाज़ार की स्थापना को सक्षम बनाता है, जो शहरों और व्यवसायों को उनकी ऊर्जा खपत कम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

अमृत कार्यक्रम ने नगरपालिकाओं को ऊर्जा-दक्ष जल आपूर्ति और पंपिंग प्रणालियों में उन्नयन करने में सक्षम बनाया है, जिससे लागत और ऊर्जा की मांग दोनों में कमी आई है।

भविष्य की दिशा पर बोलते हुए श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सरकारों की भूमिका स्थिर नीतिगत रूपरेखाएँ प्रदान करने की है, जो शहरों को अपने उपनियमों और विकास विनियमों को अद्यतन करने में सहायता करें।

उन्होंने कहा कि सरकारों को नवोन्मेषी वित्त तक पहुँच का विस्तार करने और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करने के लिए कार्य करना चाहिए।

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