नई दिल्ली । विज्ञान और प्रौद्योगिकी के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने बुधवार को भारत की पहली स्वदेशी “CRISPR”-आधारित जीन थेरेपी लॉन्च की, जो खासतौर पर देश की जनजातीय आबादी को प्रभावित करने वाले सिकल सेल रोग के इलाज के लिए विकसित की गई है।
यह तकनीक एक तरह की “सटीक आनुवंशिक सर्जरी” की तरह काम करती है, जो न केवल सिकल सेल रोग का इलाज करने में सक्षम है बल्कि कई अनुवांशिक बीमारियों के उपचार के रास्तों को भी बदल सकती है।
इस थेरेपी का नाम “BIRSA 101” रखा गया है, जो महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित है, जिनकी 150वीं जयंती कुछ दिन पहले मनाई गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने सिकल सेल रोग–मुक्त राष्ट्र बनने की अपनी निर्णायक यात्रा औपचारिक रूप से शुरू कर दी है, जो देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और जीनोमिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी के विकास और हस्तांतरण के साथ, देश ने 2047 तक सिकल सेल–मुक्त भारत के विज़न को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, साथ ही अग्रणी चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक लागत के एक छोटे हिस्से में विश्व-स्तरीय उपचार विकसित करने में सक्षम है, जो विदेशों में 20–25 करोड़ रुपये की कीमत वाले उपचारों का विकल्प बन सकता है।
सिंह ने वैज्ञानिक संस्थानों से आग्रह किया कि वे अपने शोध और प्रगति को सरल भाषा, इन्फोग्राफिक्स और सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करें, ताकि लोग इन उपलब्धियों का वास्तविक महत्व समझ सकें।
अपने दौरे के दौरान, सिंह ने CSIR-IGIB में एक नए अत्याधुनिक शोध और ट्रांसलेशनल सुविधा का उद्घाटन किया।
इसके अलावा, CSIR-IGIB और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया प्रा. लि. के बीच एक औपचारिक तकनीक हस्तांतरण और सहयोग समझौता भी किया गया।
