Tuesday, March 3

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले Income tax बिल 2025 को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने इस बिल पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें 285 से अधिक अहम सुझाव शामिल किए गए हैं। समिति की ये रिपोर्ट सर्वसम्मति से मंजूर की गई है और सरकार ने इनमें से अधिकतर सिफारिशों को मान लिया है। इससे संकेत मिलते हैं कि इनकम टैक्स बिल 2025 संसद में बिना किसी बड़े विरोध के पारित हो सकता है।

यह बिल कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इसमें कुछ पुराने टैक्स प्रावधानों को फिर से शामिल करने की सिफारिश की गई है, जिन्हें हटाए जाने पर करदाताओं और कंपनियों में चिंता का माहौल था। आइए समझते हैं कि इनकम टैक्स बिल 2025 में क्या प्रमुख बातें हैं, समिति ने क्या सुझाव दिए हैं, और सरकार ने क्या माना है।

सेक्शन 80M की वापसी: कंपनियों को राहत

समिति की सबसे अहम सिफारिशों में सेक्शन 80M को फिर से इनकम टैक्स कानून में शामिल करने की बात है। यह प्रावधान एक कंपनी को दूसरी कंपनी से मिले डिविडेंड पर टैक्स छूट देता है, ताकि एक ही इनकम पर दो बार टैक्स न लगे। इंडस्ट्री लंबे समय से मांग कर रही थी कि अगर यह प्रावधान नहीं रहा, तो इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड पर दोहरा टैक्स देना पड़ेगा, जिससे मल्टी-लेयर कॉरपोरेट स्ट्रक्चर पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है, जिससे कंपनियों ने राहत की सांस ली है।

खोज और जब्ती (Search & Seizure) प्रावधानों पर चर्चा

बिल में टैक्स चोरी की रोकथाम के लिए खोज और जब्ती से जुड़े प्रावधानों पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। पुराने कानून में कंपनियों को यह विकल्प दिया गया था कि यदि वे कोई टैक्स छूट नहीं लेती हैं, तो उन्हें 22% की दर से टैक्स देना होगा। लेकिन नए बिल में यह विकल्प हटाया गया था, जिससे चिंता उत्पन्न हुई। समिति ने सिफारिश की कि इस 22% टैक्स वाले प्रावधान को बरकरार रखा जाए और सरकार ने इसे भी मान लिया है।

फेसलेस असेसमेंट को लेकर चिंता

समिति के समक्ष आए करदाताओं और विशेषज्ञों ने सबसे अधिक चिंता फेसलेस असेसमेंट को लेकर जताई। उनका मानना था कि फेसलेस सिस्टम पारदर्शिता तो बढ़ाता है, लेकिन इसमें संवादहीनता और तकनीकी जटिलताओं के कारण करदाता असहाय हो जाते हैं। उन्होंने प्रोसेस को आसान और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने की मांग की।

विदेश में नौकरी करने वालों को स्पष्टता

पुराने कानून में यह स्पष्ट किया गया था कि रोजगार के उद्देश्य से विदेश जाने वाले लोग भारत में टैक्स रेजिडेंट नहीं माने जाते हैं। नए बिल में यह भाषा हटा दी गई थी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। समिति ने यह भाषा फिर से जोड़ने की सिफारिश की, जिससे प्रवासी भारतीयों को राहत मिलेगी। सरकार ने इस सुझाव को भी स्वीकार कर लिया है।

‘शून्य टीडीएस प्रमाण पत्र’ की वापसी

कुछ खास मामलों में कंपनियों को टैक्स विभाग से ‘Nil TDS Certificate’ मिलता है, जिससे वे किसी भुगतान पर टैक्स नहीं काटती हैं। यह व्यवस्था पुराने कानून में थी, लेकिन नए बिल में इसे हटाया गया था। समिति ने इसे फिर से शामिल करने का सुझाव दिया और सरकार ने इसे भी स्वीकार कर लिया है।

टैक्स दरों में सरलता और पारदर्शिता की मांग

समिति के सामने कई हितधारकों ने टैक्स की दरों की जटिलता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि टैक्स की कटौती की दरें कम और स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि टैक्स भरने की प्रक्रिया आम करदाता के लिए आसान हो।

बिल की भाषा में सरलता, नियमों में नहीं हुआ बड़ा बदलाव

समिति का मुख्य उद्देश्य बिल की भाषा को सरल और स्पष्ट बनाना था। इसका कारण यह था कि मौजूदा टैक्स कानून की जटिल भाषा के कारण आम करदाता और व्यवसायी दोनों को भ्रम होता है। हालांकि समिति ने नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, बल्कि शब्दों की स्पष्टता पर ध्यान दिया है।

वेतनभोगियों को भी फायदा: स्टैंडर्ड डिडक्शन और ग्रेच्युटी को समाहित किया गया

बिल में वेतनभोगी कर्मचारियों को मिल रही छूटों जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन और ग्रेच्युटी को एक ही अनुभाग में समाहित कर दिया गया है, जिससे करदाता को समझने और दावा करने में आसानी होगी। इसके साथ ही जुर्माने और अन्य प्रक्रियाओं को भी सरल किया गया है।

GAAR प्रावधान होंगे और सख्त

टैक्स चोरी रोकने के लिए बनाए गए GAAR (General Anti Avoidance Rules) प्रावधानों को और मजबूत किया गया है, जिससे गलत मंशा से टैक्स बचाने की कोशिशों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

बैजयंत पांडा समिति की भूमिका महत्वपूर्ण

समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने की और इस समिति ने 36 बार बैठक कर बिल के 536 प्रावधानों की समीक्षा की। इस रिपोर्ट को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में पेश किया जाएगा।

वित्त मंत्री का उद्देश्य: कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाना

फरवरी 2025 में पेश किए गए इस बिल को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने “आम जनता के लिए टैक्स प्रणाली को आसान और विवाद रहित” बनाने की दिशा में अहम कदम बताया था। यह बिल 1961 के पुराने टैक्स कानून की जगह लेगा और पूरी कर व्यवस्था को एक नई दिशा देगा।

करदाताओं, कंपनियों और प्रवासी भारतीयों को राहत

इनकम टैक्स बिल 2025 में सरकार और समिति की सहमति से किए गए बदलावों से न सिर्फ कंपनियों को राहत मिलेगी बल्कि आम करदाताओं, प्रवासी भारतीयों और वेतनभोगी कर्मचारियों को भी स्पष्टता और सरलता मिलेगी। इस नए बिल के जरिए भारत की कर प्रणाली अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और जनता केंद्रित बन सकेगी।

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