Wednesday, February 4

नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि स्वच्छ और विविधीकृत ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत का संक्रमण, आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक अनुकूलता के साथ अटूट रूप से जुड़ा हुआ है।

नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा को अपनाने या न अपनाने पर बहस अब बेमानी हो गई है, क्योंकि आज वैश्विक आम सहमति ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को सतत विकास, आर्थिक लचीलेपन और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक मानती है।

उन्होंने कहा, “यदि भारत को आगे बढ़ना है, तो इसका कोई अन्य विकल्प नहीं है। भारत अब वैश्विक संकेतों का अनुसरण नहीं कर रहा है; आज अन्य देश दिशा-निर्देश के लिए भारत की ओर देख रहे हैं।”

मंत्री ने उल्लेख किया कि सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को भेदभाव के चश्मे से नहीं, बल्कि उनकी उपयुक्तता, विश्वसनीयता और अनुप्रयोग-विशिष्ट उपयोगिता के आधार पर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भले ही नवीकरणीय ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) का एक बड़ा हिस्सा होगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों—जैसे डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत कंप्यूटिंग—को निर्बाध, स्थिर और 24/7 बिजली की आवश्यकता होती है, जहाँ परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा, “भविष्य एक ‘हाइब्रिड ऊर्जा मॉडल’ में निहित है, जहाँ प्रत्येक ऊर्जा स्रोत को वहीं तैनात किया जाएगा जहाँ वह सबसे अधिक लागत प्रभावी और कुशल साबित हो।”

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