रायपुर | एशिया का सबसे बड़ा और लगभग 29 करोड़ वर्ष पुराना गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क, मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़) को वन विभाग द्वारा किए गए वैज्ञानिक संरक्षण और सतत पुनर्स्थापन कार्यों के बाद नई राष्ट्रीय पहचान मिली है। यह जानकारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में सोमवार को दी गई।
इन प्रयासों ने न सिर्फ एक उपेक्षित प्राकृतिक विरासत स्थल को नया जीवन दिया है, बल्कि इसे पारिस्थितिकी आधारित संरक्षण मॉडल के रूप में भी स्थापित किया है।
इसी के लिए वन मंडल अधिकारी (DFO) मनेंद्रगढ़, मनीष कश्यप को नई दिल्ली में “नेक्सस ऑफ गुड फाउंडेशन अवॉर्ड्स 2025” से सम्मानित किया गया।
गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क एशिया का सबसे बड़ा मरीन फॉसिल स्थल है। भारत में ऐसे केवल पाँच स्थान हैं जहाँ समुद्री जीवाश्म पाए जाते हैं। वर्ष 1954 में खोजे जाने के बावजूद यह अनोखी प्राकृतिक धरोहर लंबे समय तक पर्यटन मानचित्र में प्रमुखता नहीं पा सकी।
प्राकृतिक रूप से मौजूद विशाल ग्रेनाइट चट्टानों पर 35 प्राचीन प्रजातियों (जिसमें डायनासोर प्रजाति भी शामिल है) की मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो पर्यटकों को प्रागैतिहासिक जीवन का वास्तविक अनुभव कराती हैं।
इसके अलावा कैक्टस गार्डन, आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर और हसदेव नदी में नौकायन सुविधा ने पार्क के पर्यटन आकर्षण को और बढ़ा दिया है।
पहले सरगुजा संभाग में पर्यटक मुख्य रूप से मैनपाट जाते थे, लेकिन अब गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क तेजी से एक नए पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
