नई दिल्ली । जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संस्कृति मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सहयोग से घोषणा की है कि ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025 का आयोजन 12 नवंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में किया जाएगा।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बुधवार को बताया गया कि यह घोषणा 17 अक्टूबर को आदि कर्मयोगी अभियान पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान की गई थी।
इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य जनजातीय उद्यमियों को सशक्त बनाना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
यह पहल जनजातीय उद्यमिता को मुख्यधारा में लाने, स्वदेशी उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने, तथा सतत उद्यम विकास के लिए क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
यह वित्तीय पहुंच को सुगम बनाएगी, बाजार संबंधों को मजबूत करेगी, और जनजातीय समुदायों के लिए निवेश के नए अवसर खोलेगी।
पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक व्यवसायिक प्रथाओं और तकनीक से जोड़ते हुए, यह कॉन्क्लेव जमीनी नवाचारों को राष्ट्रीय और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ने का लक्ष्य रखता है, जिससे सतत, संसाधन-कुशल और समुदाय-आधारित व्यापार मॉडल विकसित किए जा सकें।
मुख्य रणनीतिक भागीदारों में फिक्की, प्रयोगी (पैनआईआईटी एलुमनाई रीच फॉर ग्राम उद्योगी) फाउंडेशन और स्टार्टअप इंडिया शामिल हैं, जो जनजातीय उद्यमों के मेंटरशिप, निवेश और इनक्यूबेशन के लिए एक मजबूत मंच सुनिश्चित करेंगे।
कॉन्क्लेव की प्रमुख विशेषताएं
- रूट्स टू राइज (पिचिंग सत्र): जनजातीय उद्यमियों के लिए एक विशेष मंच, जहां वे अपने व्यावसायिक विचार निवेशकों, सीएसआर नेताओं और सरकारी संस्थानों के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे उन्हें मार्गदर्शन, वित्तपोषण और इनक्यूबेशन के अवसर मिलेंगे।
- नॉलेज सेशंस: उद्योग नेताओं और नीति-निर्माताओं के साथ वित्त, ब्रांडिंग, नवाचार और क्षमता निर्माण पर आधारित संवाद और मास्टरक्लास।
- सीईओ फोरम: कौशल विकास, स्थिरता, नवाचार और बाजार पहुंच पर रणनीतिक चर्चा हेतु नेतृत्व संवाद।
- प्रदर्शनी एवं मंडप: 100 से अधिक जनजातीय स्टार्टअप्स और सूक्ष्म उद्यमों द्वारा हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, वन उपज और हरित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन।
- बायर–सेलर मीट्स: जनजातीय उत्पादकों और कॉर्पोरेट/सरकारी खरीदारों के बीच सीधे संपर्क को सुगम बनाना, जिससे दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित हो सके।


