नई दिल्ली । भारत सरकार ने एलन Musk और Foxconn की साझेदारी वाली कंपनी को उत्तर प्रदेश के जेवर में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 37 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जो भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस प्लांट की खासियत ये है कि यह भारत में बना पहला बड़ा सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र होगा। शुरुआत में यहां चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग (OSAT यूनिट) का काम शुरू होगा। इसके बाद अगले दो से तीन वर्षों में यही यूनिट पूरी तरह से चिप निर्माण भी करने लगेगी।
भारत सरकार की ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ के तहत इस प्रोजेक्ट को तेज़ी से मंजूरी दी गई है। यह मंजूरी मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और आत्मनिर्भर भारत अभियानों के लिए बहुत अहम मानी जा रही है।
इस यूनिट से न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा, बल्कि यह हजारों युवाओं को रोजगार भी देगा। साथ ही भारत अब चीन और ताइवान पर अपनी चिप ज़रूरतों के लिए निर्भर नहीं रहेगा।
एपल में भारतीय मूल के सबीह खान को बड़ी जिम्मेदारी

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी एपल (Apple Inc.) ने भारतीय मूल के सबीह खान को अपनी कंपनी का नया COO (Chief Operating Officer) नियुक्त किया है। यह पद Apple में CEO के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। सबीह खान का जन्म उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ था। वे कई साल पहले अमेरिका चले गए थे और अब दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं।
सबीह पिछले 24 वर्षों से एपल कंपनी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अब तक कंपनी की ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट, सस्टेनेबल प्रोडक्शन, और इनोवेटिव लॉजिस्टिक्स में बड़ी भूमिका निभाई है। एपल के CEO टिम कुक ने सबीह खान को “शानदार रणनीतिकार” बताया और कहा कि “उनकी नेतृत्व क्षमता, वैश्विक समझ और संचालन में दक्षता Apple को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।”
इस उपलब्धि से भारत और खासकर उत्तर प्रदेश के युवाओं को बहुत प्रेरणा मिल सकती है कि मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति ग्लोबल कंपनियों के टॉप पदों तक पहुंच सकता है।
भारत में शुरू हुआ पहला सेमीकंडक्टर प्लांट
आज भारत में पहला फुल-स्केल सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो गया है। इस प्लांट का उद्घाटन प्रधानमंत्री कार्यालय के निगरानी में हुआ, और इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। यह प्लांट गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के क्लस्टर मॉडल में विकसित हो रहा है, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और मोबाइल इंडस्ट्री में लगने वाली चिप्स तैयार की जाएंगी।

इस यूनिट की खास बात यह है कि इसमें पहले OSAT यानी आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेम्बली एंड टेस्टिंग का काम होगा, जिससे भारत चिप तैयार नहीं बल्कि उसकी क्वालिटी जांच और पैकिंग में माहिर बनेगा। अगले दो से तीन साल में यहां मूल चिप निर्माण (fabrication) भी शुरू हो जाएगा।
भारत सरकार ने इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को 75% तक की सब्सिडी देने का ऐलान किया है ताकि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत में निवेश करें। इसके ज़रिए भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो सेमीकंडक्टर निर्माण कर सकते हैं। इससे भारत के ‘डिजिटल आत्मनिर्भरता’ मिशन को नई उड़ान मिली है।
भारत क्यों बन रहा है टेक्नोलॉजी का अगला ग्लोबल सेंटर?
आज की तीनों खबरें इस ओर इशारा करती हैं कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और इनोवेटर भी बन रहा है।
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मस्क जैसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भारत आना बताता है कि दुनिया अब भारत को भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन मानने लगी है।
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सबीह खान जैसे भारतीय अब ग्लोबल कंपनियों की लीडरशिप में पहुंच बना रहे हैं।
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भारत सरकार की सेमीकंडक्टर नीति अब जमीनी स्तर पर वास्तविक निर्माण के रूप में दिखने लगी है।
भारत अब चीन, अमेरिका, ताइवान और कोरिया जैसे देशों को टक्कर देने के लिए तैयार हो रहा है — और इसकी नींव आज के दिन रखी गई।

