सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के रिटेल भुगतानों में डिजिटल लेनदेन का हिस्सा 99.8 प्रतिशत रहा।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS), इमीजिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) और अन्य माध्यमों द्वारा संचालित डिजिटल भुगतानों ने खुदरा लेनदेन में प्रभुत्व कायम किया — जो चालू वित्त वर्ष (FY26) की पहली तिमाही में कुल भुगतान मूल्य का 92.6 प्रतिशत और लेनदेन की मात्रा का 99.8 प्रतिशत है।
CareEdge Analytics and Advisory की रिपोर्ट के अनुसार, “यह प्रवृत्ति दिखाती है कि इंटरनेट प्रसार (मार्च 2021 में 60.7 प्रतिशत से जून 2025 में 70.9 प्रतिशत) और स्मार्टफोन उपयोग में वृद्धि ने इस बदलाव को तेज़ किया है, जिससे पहले से बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहे लोगों को औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में शामिल कर वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन मिला है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI अपनी तेज़ वृद्धि बनाए रखेगा और भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य में अपने प्रभुत्व को और मजबूत करेगा।
हालांकि डिजिटल विस्तार के बावजूद नकद का उपयोग अभी भी मज़बूत बना हुआ है, जो निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखे हुए है।
भारत का भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र एक संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है, जहाँ डिजिटल और नकद दोनों चैनल सह-अस्तित्व में हैं — जो अलग-अलग लेकिन परस्पर पूरक भूमिकाएँ निभाते हैं।


