नई दिल्ली । देशभर के नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने प्राइवेट गाड़ियों (जैसे कार, जीप और वैन) के लिए Fastag वार्षिक पास की घोषणा की है, जिसकी कीमत ₹3000 होगी। इस पास से गाड़ी 200 बार टोल प्लाजा क्रॉस कर सकती है, यानी एक टोल की औसतन कीमत ₹15 होगी।
इस नए सिस्टम की जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने बताया कि इससे हाईवे पर जाम कम होगा और यात्रियों को सुविधाजनक ट्रैवल अनुभव मिलेगा।
क्या है ये नया वार्षिक Fastag पास?
अब तक फास्टैग से हर बार टोल कटता था, लेकिन नया सिस्टम आपको ₹3000 में या तो एक साल या अधिकतम 200 टोल पासिंग्स की सुविधा देगा। यानी जो लोग बार-बार हाईवे पर सफर करते हैं, उनके लिए ये बहुत ही किफायती विकल्प है।
गडकरी के मुताबिक, इतनी यात्राओं पर आमतौर पर ₹10,000 से ज्यादा खर्च होते हैं, जो अब सिर्फ ₹3000 में हो जाएंगे।
समझिए नया फास्टैग पास
1. पहले से फास्टैग है, फिर ये पास क्यों ज़रूरी है?
पहले हर टोल पर पेमेंट कटता था। लेकिन अब ₹3000 में 200 ट्रिप्स के लिए कोई कटौती नहीं होगी। ये खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। इससे न सिर्फ पैसा बचेगा, बल्कि टोल प्लाजा पर ट्रैफिक भी घटेगा।
2. यह पास मिलेगा कहां से और कैसे?
पास के लिए अप्लाई करना बेहद आसान होगा।
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NHAI की आधिकारिक वेबसाइट और
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हाईवे ट्रैवल मोबाइल ऐप पर 15 अगस्त से एक नया सेक्शन शुरू किया जाएगा।
वहां से आप अपना वार्षिक पास ऑनलाइन खरीद सकेंगे।
3. 60 किलोमीटर रूल को कैसे सुलझाएगा ये पास?
कई लोग शिकायत करते थे कि घर से ऑफिस या काम के रास्ते में ही टोल पड़ता है, और उन्हें हर बार शुल्क देना पड़ता है। नया पास ऐसे 60 किलोमीटर के दायरे में बार-बार ट्रैवल करने वाले यात्रियों के लिए आदर्श समाधान है। अब रोजाना टोल देने की जरूरत नहीं।
4. क्या यह पास हर टोल प्लाजा पर चलेगा?
हां, लेकिन केवल नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर।
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दिल्ली से मुंबई
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बेंगलुरु से चेन्नई
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कोलकाता से भुवनेश्वर जैसे सभी नेशनल रूट्स पर यह पास मान्य होगा।
हालांकि, स्टेट हाईवे और लोकल बॉडी द्वारा संचालित टोल पर यह पास मान्य नहीं होगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है इस पास के पीछे?
सरकार इस पहल से टोल प्रणाली को डिजिटल और सुगम बनाना चाहती है।
इस पास से ये लाभ होंगे:
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टोल प्लाजा पर लंबी कतारें घटेंगी
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डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा
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ड्राइवर और टोल स्टाफ के बीच विवाद कम होंगे
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बार-बार टोल भुगतान करने की परेशानी खत्म होगी
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हाईवे पर यात्रा तेज, सुलभ और तनावमुक्त होगी
फास्टैग क्या है और कैसे काम करता है?
फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जिसमें वाहन की विंडस्क्रीन पर एक RFID चिप वाला स्टिकर लगाया जाता है।
यह स्टिकर वाहन चालक के बैंक अकाउंट या फास्टैग वॉलेट से लिंक होता है।
जैसे ही गाड़ी टोल प्लाजा पर पहुंचती है, सेंसर फास्टैग को स्कैन करता है और अपने आप पेमेंट हो जाता है, जिससे रुकने की जरूरत नहीं होती।
फायदे:
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समय और फ्यूल की बचत
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ट्रैफिक में कमी
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क्यूलेस यात्रा का अनुभव
डिजिटल इंडिया के लिए एक और कदम
₹3000 का यह वार्षिक फास्टैग पास उन लाखों लोगों के लिए राहत है जो नेशनल हाईवे का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। इससे टोल सिस्टम की पारदर्शिता बढ़ेगी, ट्रैफिक घटेगा और नागरिकों को सस्ता और सरल सफर मिलेगा।
15 अगस्त 2025 से यह सुविधा शुरू हो जाएगी। सरकार की मंशा है कि इस मॉडल को भविष्य में और अधिक आधुनिक डिजिटल टोल सिस्टम से जोड़ा जाए।
