रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामलेमे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सीएमओ में उप सचिव रहीं निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया को रायपुर की एक विशेष अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें दो दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
चौरसिया को ईडी ने मंगलवार देर शाम गिरफ्तार किया गया था।
ईडी ने कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच कर रही ईडी ने वरिष्ठ नौकरशाह से पूछताछ के लिए तीन दिन की हिरासत मांगी थी।
ईडी की जांच में चौरसिया की कथित तौर पर घोटाले में संलिप्तता का पता चला। उन्होंने कथित तौर पर घोटाले से उत्पन्न अपराध की आय के रूप में 115 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी ने पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल (2018-23) के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव के तौर पर पदस्थ थी।
वह कथित कोयला लेवी घोटाले में भी आरोपी हैं और 2022 में गिरफ्तार हुई थीं। उन्हें इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था।
शराब घोटाले के मामले में ईडी ने इस साल 15 जनवरी को कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और 18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था।
ईडी ने आरोप लगाया है कि 71 वर्षीय लखमा अपराध की आय के मुख्य प्राप्तकर्ता थे जिन्होंने आबकारी मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी प्राप्त की थी।
इसमें आगे दावा किया गया कि चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले के पीछे के सिंडिकेट का मुखिया था और उसने इस घोटाले से मिले करीब 1,000 करोड़ रुपये को पर्सनली हैंडल किया था।
ईडी के अनुसार, यह कथित घोटाला 2019 और 2022 के बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था, जिससे राज्य के खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट के सदस्यों को अवैध फायदा हुआ।
राज्य का एंटी-करप्शन ब्यूरो/इकोनॉमिक ऑफेंस विंग इस कथित घोटाले में भ्रष्टाचार के एंगल की जांच कर रहा है।


