नई दिल्ली | आर्यभट्ट प्रेक्षणीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के शोधकर्ताओं ने 100 से अधिक वर्ष पुराने कोडाईकनाल सोलर ऑब्ज़र्वेटरी (KoSO) में लिए गए ऐतिहासिक सौर चित्रों का विश्लेषण कर सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय व्यवहार का पुनर्निर्माण करने का एक तरीका खोजा है।
KoSO, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) का एक फील्ड स्टेशन है, जो कोडाईकनाल में स्थित है। IIA, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
KoSO का अभिलेखागार एक विशाल बिग-डेटा संसाधन माना जाता है, जिसमें एक सदी से अधिक के अवलोकन अब डिजिटाइज़ किए जा चुके हैं। इस डेटा सेट को इटली के रोम-PSPT के हालिया अवलोकनों के साथ मिलाकर, शोधकर्ताओं ने उन्नत फीचर-आइडेंटिफिकेशन एल्गोरिदम का उपयोग कर सूर्य के ध्रुवों के पास मौजूद बहुत छोटे चमकीले बिंदुओं — जिन्हें पोलर नेटवर्क कहा जाता है — की पहचान की। इससे उन्हें पिछले सौ वर्षों में सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्र का अनुमान लगाने में मदद मिली।
शोधकर्ताओं ने बताया कि पोलर नेटवर्क सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति का एक प्रभावी “प्रॉक्सी”—अर्थात उसका प्रतिनिधि—है। उन्होंने इस पुनर्निर्माण का उपयोग वर्तमान सौर चक्र 25 की शक्ति का अनुमान लगाने में भी किया।
सूर्य के चुंबकीय व्यवहार को समझना वैज्ञानिकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वे सौर तूफ़ानों की भविष्यवाणी कर सकते हैं, जो उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, GPS को बाधित कर सकते हैं और बिजली ग्रिड तक ठप कर सकते हैं। यह नई पद्धति — ऐतिहासिक चित्रों और स्वचालित एल्गोरिदम का उपयोग कर — सूर्य के चुंबकीय व्यवहार का पहले की तुलना में कहीं अधिक लंबा और विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराती है।
पुनर्निर्मित ध्रुवीय क्षेत्र और पोलर नेटवर्क इंडेक्स (PNI) श्रृंखला सहित पूरा डेटा सेट GitHub और Zenodo पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जिससे दुनिया भर के शोधकर्ता सूर्य के चुंबकीय इतिहास का और विस्तृत अध्ययन कर सकते हैं।
KoSO में, सौर खगोलविदों ने 1904 से ही Ca II K नामक विशेष तरंगदैर्घ्य पर सूर्य का अवलोकन करना शुरू कर दिया था। यह तरंगदैर्घ्य सूर्य के क्रोमोस्फीयर की गतिविधियों को दर्शाता है। क्रोमोस्फीयर, सूर्य की दृश्य सतह के ठीक ऊपर की परत है, जहां चुंबकीय गतिविधियों के कारण प्लेज और नेटवर्क जैसी चमकीली संरचनाएँ बनती हैं। यह सदी-लंबा अवलोकन सूर्य के चुंबकीय रहस्यों को उजागर करने की कुंजी है।


