बेंगलुरु । बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीजर प्रणाली का अपना संस्करण विकसित किया है, जिससे यह तकनीक भारत के वैज्ञानिकों के लिए अधिक सुलभ हो गई है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में दी गई।
ऑप्टिकल ट्वीजर, जिसकी खोज को 2018 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, प्रकाश की मदद से अति सूक्ष्म वस्तुओं को नियंत्रित और स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करता है।
सूक्ष्म बलों के मापन में इसका उपयोग जीवविज्ञान, बायोइंजीनियरिंग, मटेरियल साइंस और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी साबित हुआ है।
रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की खोज ने एक नई ऑप्टिकल ट्रैपिंग प्रणाली तैयार की है, जो पारंपरिक डुअल-ट्रैप ऑप्टिकल ट्वीजर की कमियों को दूर करती है।
यह नया सिंगल-मॉड्यूल ट्रैपिंग और डिटेक्शन डिज़ाइन एकल अणुओं के उच्च-सटीकता बल मापन, जैविक नमूनों सहित सॉफ्ट मटेरियल की जांच, तथा कोशिकाओं जैसे जैविक नमूनों की सूक्ष्म-हेरफेर (micromanipulation) को अधिक सुविधाजनक और किफायती बनाता है।
इसी आधार पर, शोधकर्ता अब इस डुअल-ट्रैप तकनीक को मौजूदा वाणिज्यिक माइक्रोस्कोप के लिए प्लग-एंड-प्ले क्षमता वाले सिंगल-मॉड्यूल ऐड-ऑन उत्पाद के रूप में व्यावसायिक बनाने में रुचि ले रहे हैं।


