नई दिल्ली । भारत में जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth – SRB) में 18 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) रिपोर्ट 2023 के अनुसार, 2016-18 में जहाँ यह अनुपात 819 कन्याएँ प्रति 1,000 बालक था, वहीं 2021-23 में यह बढ़कर 917 तक पहुँच गया है।
यह जानकारी सोमवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित पूर्व-गर्भाधान एवं प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1994 को सशक्त बनाने संबंधी राष्ट्रीय संवेदनशीलता बैठक में साझा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को उभरती चुनौतियों के मद्देनज़र और मजबूत करना था। इसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से खामियों को दूर करने, अनुपालन सुनिश्चित करने और कानून के उद्देश्यों को बनाए रखने पर बल दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (एनएचएम) अराधना पटनायक ने कहा, “महिलाएँ जन्म से ही अधिक सहनशील होती हैं और उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, इसलिए कन्या शिशु का जीवन रक्षा दर स्वाभाविक रूप से बालक की तुलना में अधिक होता है।”
उन्होंने आगे कहा, “केवल लिंग-आधारित भ्रूण चयन के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय हमें पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के निवारक पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।”
उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि “समाज या व्यक्ति का ध्यान बच्चे के लिंग पर नहीं, बल्कि उसके स्वस्थ होने पर होना चाहिए।”
2021-23 की अवधि के लिए राष्ट्रीय जन्म लिंगानुपात पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के सुदृढ़ क्रियान्वयन और संबंधित हस्तक्षेपों के जरिए हुई प्रगति को दर्शाता है।


