नई दिल्ली | भारत 1 जनवरी, 2026 से “कॉन्फ्लिक्ट डायमंड” (कच्चे हीरे) के व्यापार को रोकने के लिए किम्बरली प्रोसेस (KP) की अध्यक्षता संभालेगा।
किम्बरली प्रोसेस एक त्रिपक्षीय पहल है जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं। इसका उद्देश्य कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स के व्यापार को रोकना है—ये वे कच्चे हीरे होते हैं जिनका उपयोग विद्रोही समूहों या उनके सहयोगियों द्वारा उन संघर्षों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है जो सरकारों को कमजोर करते हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का चयन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शुचिता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर वैश्विक भरोसे को दर्शाता है।
किम्बरली प्रोसेस में वर्तमान में 60 प्रतिभागी हैं, जिनमें यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों को एक एकल प्रतिभागी माना जाता है। साथ मिलकर, KP प्रतिभागी वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार के 99 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसे इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाला सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाता है।
हीरे के निर्माण और व्यापार के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में, भारत का यह नेतृत्व ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीति बदल रही है और टिकाऊ व जिम्मेदार सोर्सिंग पर जोर बढ़ रहा है।
अपने कार्यकाल के दौरान, भारत शासन और अनुपालन को मजबूत करने, डिजिटल प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी को आगे बढ़ाने, डेटा-संचालित निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने और संघर्ष-मुक्त हीरों में उपभोक्ता विश्वास पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।


