नई दिल्ली । आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने सोमवार को कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा को मजबूत अनुसंधान, वैश्विक सहयोग और गुणवत्ता एवं सुरक्षा के उन्नत ढांचे के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
वे नई दिल्ली में आयोजित राजनयिकों के स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से आयोजित किया। यह कार्यक्रम 17 से 19 दिसंबर तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया।
जाधव ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक ज्ञान और प्रकृति एवं कल्याण से जुड़ी मानवता की सामूहिक समझ का भंडार है।
उन्होंने कहा, “दुनिया ने एक बार फिर ऐसे समेकित स्वास्थ्य दृष्टिकोणों की सराहना की है जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ते हैं। डब्ल्यूएचओ और जामनगर स्थित वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र के साथ निकट सहयोग में, हमारा उद्देश्य अनुसंधान को सशक्त बनाना, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बढ़ाना तथा यह सुनिश्चित करना है कि पारंपरिक चिकित्सा के लाभ सभी तक पहुँचें।”
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. कैथरीना बोहेम ने कहा, “पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक स्वास्थ्य के परिधि में नहीं, बल्कि ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के लक्ष्य को साकार करने का अभिन्न अंग है। हम देशों से मंत्रीस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में उच्चस्तरीय भागीदारी का नेतृत्व करने की अपेक्षा करते हैं। जैसे-जैसे हम शिखर सम्मेलन की ओर बढ़ रहे हैं, आइए हम सुलभ, किफायती, समावेशी और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करें।”
द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा के अभ्यास पर आधारित एक वैश्विक आंदोलन को आगे बढ़ाना है, जो मानव और पृथ्वी दोनों के लिए संतुलन बहाल करने की दिशा में कार्य करेगा। विश्व स्वास्थ्य सभा-78 द्वारा अंगीकृत वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025–2034 के मार्गदर्शन में यह शिखर सम्मेलन नवीनतम साक्ष्यों और नवाचारों को उजागर करेगा और पारंपरिक चिकित्सा के भविष्य को आकार देने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेगा।


