Wednesday, February 4

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। तुमालपाड़ के घने जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में कुल 3 माओवादी ढेर हो गए। मारे गए माओवादियों में दो महिला नक्सली भी शामिल हैं।

इस कार्रवाई में सबसे बड़ी सफलता यह रही कि सुरक्षा बलों ने शहीद एएसपी आकांश राव गिरिपुंजे की हत्या की साजिश रचने वाले और आईईडी ब्लास्ट के मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली माड़वी देवा को मार गिराया है।

वह कोंटा एरिया कमेटी का जनमिलिशिया कमांडर था और लंबे समय से इलाके में आतंक का पर्याय बना हुआ था। कई नागरिकों की हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले और आईईडी ब्लास्ट की साजिशों में उसकी सक्रिय भूमिका रही है।

सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि थाना भेज्जी और चिंतागुफा के सीमावर्ती तुमालपाड़ के पहाड़ी और घने जंगलों में माओवादियों की उपस्थिति की पुख्ता जानकारी मिलने पर डीआरजी ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

सुबह-सुबह शुरू हुए इस ऑपरेशन के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में डीआरजी ने तीनों नक्सलियों को ढेर कर दिया। घटनास्थल से हथियारों की बड़ी मात्रा और माओवादी साहित्य बरामद किया गया।

मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों की पहचान माड़वी देवा, पोडियम गंगी और सोड़ी गंगी के रूप में हुई। तीनों पर 5-5 लाख रुपए के इनाम रखे गए थे। माड़वी देवा को शहीद एएसपी आकांश राव गिरिपुंजे की हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

उस पर अनेक हत्याएं, हमले और आईईडी ब्लास्ट की साजिश रचने का आरोप है। मुठभेड़ स्थल के पास से सुरक्षा बलों ने .303 राइफल, बीजीएल लॉन्चर, गोला-बारूद, हथियारों के पुर्जे, माओवादी दस्तावेज और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की।

ये बरामदगी इस बात का संकेत है कि नक्सली दस्ता बड़े हमले की तैयारी में था, लेकिन सुरक्षा बलों ने उनकी योजना को विफल कर दिया।

बस्तर रेंज के आईडीपी सुंदरराज पट्टलिंगम ने कहा कि बस्तर में माओवाद अब खत्म होने की कगार पर है। संगठन की संरचना बिखर चुकी है। अब उनकी हिंसक चालें बेअसर साबित हो रही हैं। सक्रिय माओवादी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 233 माओवादी मारे जा चुके हैं, जिनमें केंद्रीय समिति सदस्य, डीकेएसजेडसी सदस्य और पीएलजीए कैडर शामिल हैं।

यह आंकड़ा माओवादी नेटवर्क की निर्णायक गिरावट का प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, सीआरपीएफ और अन्य बलों द्वारा क्षेत्र में लगातार सर्चिंग और डॉमिनेशन ऑपरेशन जारी है ताकि आम जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत बनी रहे।

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