रायपुर | कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने अनुमान लगाया है कि देशभर में चल रहे शादी के सीजन के दौरान 14 दिसंबर तक करीब 46 लाख शादियां होंगी, जिनसे लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगा।
CAIT ने सोमवार को कहा कि इस वर्ष शादियों में खर्च करने का तरीका भी उल्लेखनीय है।
वर्ष 2024 में 42 लाख शादियों से करीब 5.90 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था।
छत्तीसगढ़ में भी CAIT ने अनुमान लगाया है कि एक लाख शादियों से लगभग 3,500 करोड़ रुपये का व्यापार होगा।
CAIT के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर शादी के बजट का वितरण लगभग इस प्रकार है:
• 3 प्रतिशत शादियों का बजट 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच होगा
• 9 प्रतिशत का बजट 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच
• लगभग 25 प्रतिशत का बजट 25 लाख से 50 लाख रुपये के बीच
• 22 प्रतिशत शादियां 15 लाख से 25 लाख रुपये के बजट में
• सबसे बड़ा हिस्सा 41 प्रतिशत का होगा, जिनका बजट 15 लाख रुपये से कम होगा
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शादी उद्योग छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े सेवा प्रदाताओं तक सभी वर्गों के लिए व्यापक आर्थिक संभावनाएं पैदा करता है।
CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी ने कहा, “भारतीय शादी अर्थव्यवस्था देश का सबसे बड़ा असंगठित पर अत्यंत प्रभावी क्षेत्र है। यह न सिर्फ परंपरा और संस्कृति को दर्शाती है, बल्कि व्यापार, रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला एक मजबूत आर्थिक इंजन भी है।”
इस साल प्री-वेडिंग खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ती आय, कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल और त्योहारों के दौरान उपभोक्ता विश्वास में सुधार के कारण शादी उद्योग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है।
एक अध्ययन में पाया गया है कि शादी में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, आभूषण, सजावट की सामग्री, बर्तन तथा कैटरिंग सामग्री सहित 70 प्रतिशत से अधिक उत्पाद अब देश में ही बन रहे हैं, उन्होंने कहा।
CAIT के ‘वोकल फॉर लोकल वेडिंग्स’ अभियान के कारण चीनी लाइटिंग, आयातित सजावट और गिफ्ट एक्सेसरीज़ की मांग में भारी गिरावट आई है।
शादी का वर्ष 2025 का सीजन एक करोड़ से अधिक अस्थायी और पार्ट-टाइम नौकरियां पैदा करने की संभावना रखता है, जिससे डेकोरेटर्स, कैटरर्स, फ्लोरिस्ट्स, कलाकारों, परिवहन प्रदाताओं, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और MSMEs को सीधा लाभ मिलेगा।


