नई दिल्ली | केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि साहसिक दृष्टि, ईमानदार मंशा और निरंतर क्रियान्वयन किसी भी राष्ट्र की तकदीर बदल सकते हैं।
उन्होंने यह बात नई दिल्ली में एक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कही।
गोयल ने कहा कि देश अधिशेष बिजली उत्पादन, ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा में नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन संयोगवश नहीं हुआ, बल्कि स्पष्ट दृष्टि और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत बिजली की कमी की स्थिति से निकलकर बिजली सुरक्षा की ओर बढ़ा है और अब बिजली की स्थिरता की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में देश ने अब तक का सर्वाधिक 1,048 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया, जबकि कोयला आयात में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में 46 गुना वृद्धि हुई है, जिससे देश वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक बन गया है, वहीं पवन ऊर्जा क्षमता 2014 में 21 गीगावॉट से बढ़कर 2025 में 53 गीगावॉट हो गई है।
मंत्री ने कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र का यह परिवर्तन पांच स्तंभों पर आधारित है—सार्वभौमिक पहुंच, वहनीयता, उपलब्धता, वित्तीय व्यवहार्यता और स्थिरता।


