नई दिल्ली । भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने शुक्रवार को ‘आधार विज़न 2032’ नामक एक व्यापक रणनीतिक और तकनीकी समीक्षा जारी की, जिसका उद्देश्य अगले दशक में आधार के विकास की दिशा तय करना है।
यह दूरदृष्टि वाला रोडमैप आधार की तकनीकी नींव को मजबूत करने, उभरते डिजिटल नवाचारों को एकीकृत करने और भारत के डिजिटल पहचान प्लेटफॉर्म को अधिक सुदृढ़, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाने पर केंद्रित है।
यूआईडीएआई का तकनीकी ढांचा बड़े पैमाने पर उन्नयन के दौर से गुजरने वाला है।
इस परिवर्तन को दिशा देने के लिए यूआईडीएआई ने नीलकंठ मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की है।
यह समिति शिक्षा, उद्योग और प्रशासन के प्रख्यात विशेषज्ञों और नेताओं को साथ लाकर आधार के नवाचार रोडमैप को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करेगी।
समिति ‘आधार विज़न 2032’ दस्तावेज़ तैयार करेगी, जिसमें अगली पीढ़ी की आधार संरचना की रूपरेखा होगी। यह रूपरेखा भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम और गोपनीयता व साइबर सुरक्षा के उभरते वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी।
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आधार विकसित होती साइबर सुरक्षा चुनौतियों के प्रति सक्षम, भविष्य की मांगों के अनुरूप विस्तार योग्य और तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के प्रति अनुकूल बना रहे।


