CERT-In के अनुसंधान सहयोग, सार्वजनिक–निजी भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों में सहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी डिजिटल इंडिया के विज़न के अनुरूप एक मज़बूत और भरोसेमंद साइबर रक्षा ढांचा विकसित कर रही है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई।
भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से 12 दिसंबर को यूरोप, अमेरिका और मध्य एशियाई देशों से आए पत्रकारों के लिए साइबर सुरक्षा से संबंधित एक परिचयात्मक भ्रमण और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया।
CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने बताया कि अनुसंधान सहयोग, सार्वजनिक–निजी भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों में सहभागिता के जरिए CERT-In डिजिटल इंडिया के विज़न के अनुरूप एक मज़बूत और विश्वसनीय साइबर रक्षा संरचना को सुदृढ़ कर रहा है।
डॉ. बहल ने कहा कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस दोधारी तलवार की तरह है, जो रक्षकों और विरोधियों—दोनों को सक्षम बनाती है।
उन्होंने बताया कि CERT-In किस प्रकार एआई-आधारित विश्लेषण और स्वचालन का उपयोग कर वास्तविक समय में साइबर घटनाओं का पता लगाने, उन्हें रोकने और उन पर प्रतिक्रिया देने का काम करता है, साथ ही दुर्भावनापूर्ण एआई-सक्षम हमलों के खिलाफ प्रतिरोधक उपाय भी विकसित करता है।
आगंतुक पत्रकारों को CERT-In के निरंतर साइबर सुरक्षा अभ्यासों, क्षमता निर्माण पहलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के बारे में जानकारी दी गई, जिनमें फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (ANSSI) के साथ मिलकर एआई पर एक उच्चस्तरीय जोखिम विश्लेषण रिपोर्ट पर किया गया संयुक्त कार्य भी शामिल है।
उन्हें वैश्विक और क्षेत्रीय साइबर सुरक्षा मंचों में CERT-In की भागीदारी, सहकारी बैंकों में साइबर सुरक्षा लचीलापन मज़बूत करने की पहलों और नागरिकों के डिजिटल उपकरणों को बॉट्स व मैलवेयर से सुरक्षित रखने के प्रयासों के बारे में भी अवगत कराया गया। इन पहलों को जनवरी 2025 में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक’ में रेखांकित किया गया है।
डॉ. बहल ने बताया कि वर्ष 2024 में भारत में 147 रैनसमवेयर घटनाएं दर्ज की गईं और CERT-In द्वारा वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने तथा फॉरेंसिक सहायता प्रदान करने से इनके प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिली।


