नई दिल्ली । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कंटेनरों में परिवहन किए जाने वाले बल्क सीमेंट के लिए मालभाड़ा दरों के युक्तिकरण और बल्क सीमेंट टर्मिनलों के लिए नई नीति की घोषणा की।
संशोधित ढांचे के तहत पहले लागू दूरी और वजन आधारित स्लैब को हटा दिया गया है। नई दर को प्रति टन प्रति किलोमीटर 0.90 रुपये की फ्लैट ग्रॉस टन किलोमीटर (GTKM) आधार पर निर्धारित किया गया है।
नई नीति का अनावरण करते हुए वैष्णव ने इस पहल को एक गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि यह सुधार उन मध्यम आय वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सीमेंट की लागत में कमी लाएगा, जो अपने घर बना रहे हैं।
वैष्णव ने बताया कि टैंक कंटेनर बल्क सीमेंट परिवहन के लिए एंड-टू-एंड, प्रदूषण-मुक्त लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करेंगे।
सरलीकृत दर संरचना वास्तविक टन भार पर आधारित है, जिसमें शुल्क ट्रेन के ग्रॉस टन किलोमीटर (GTKM) के आधार पर तय किए जाते हैं। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए दूरी और वजन आधारित पहले के सभी स्लैब समाप्त कर दिए गए हैं।
नई नीति के तहत भारतीय रेलवे देशभर में बल्क सीमेंट टर्मिनलों के विकास को भी सुगम बनाएगा, जिससे सीमेंट के हैंडलिंग, भंडारण और वितरण को और बेहतर बनाया जा सके।
ये टर्मिनल रेलवे नेटवर्क से सीधे जुड़े होंगे और इनमें हॉपर, साइलो, बैगिंग प्लांट तथा अन्य आवश्यक अवसंरचना शामिल होगी, जो बल्क सीमेंट कार्यों को कुशलतापूर्वक संचालित करने में मदद करेगी।
यह नीति एक ही खेप में बड़ी मात्रा में सीमेंट के परिवहन को सक्षम बनाएगी, पैकेजिंग की आवश्यकता को कम करेगी और रिसाव के कारण होने वाले नुकसान को न्यूनतम करेगी। इसका उद्देश्य यंत्रीकृत लोडिंग और अनलोडिंग के माध्यम से तेज टर्नअराउंड सुनिश्चित करना और सीमेंट लॉजिस्टिक्स की समग्र दक्षता बढ़ाना भी है।


