नई दिल्ली । वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मॉस्को में रूसी नेतृत्व के साथ प्रस्तावित भारत–यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा की, वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक बयान में रविवार को कहा गया।
अग्रवाल ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के व्यापार प्रभारी मंत्री आंद्रेई स्लीपनेव और रूसी संघ के उद्योग एवं व्यापार के उप मंत्री मिखाइल युरिन से मुलाकात की और भारतीय व रूसी उद्योग प्रतिनिधियों के साथ व्यापार नेटवर्किंग पूर्ण सत्र को भी संबोधित किया।
चर्चाओं में भारत–रूस व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्य समूह के परिणामों पर आगे निर्माण किया गया, जिसमें विविधीकरण, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, नियामक पूर्वानुमेयता सुनिश्चित करने और साझेदारी में संतुलित विकास को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। ये प्रयास दोनों देशों के नेताओं के उस लक्ष्य को प्रतिबिंबित करते हैं जिसमें वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने और औद्योगिक व तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारतीय निर्यात बढ़ाने की दिशा शामिल है।
मंत्री स्लीपनेव के साथ बैठक में, वाणिज्य सचिव ने वस्तुओं के क्षेत्र में भारत–ईएईयू एफटीए के अगले चरणों की समीक्षा की। 20 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित संदर्भ शर्तें (ToR) भारतीय व्यापारियों, विशेषकर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए बाज़ार विविधीकरण को लक्ष्य बनाते हुए 18 माह की कार्य योजना का खाका प्रस्तुत करती हैं।
उप मंत्री युरिन के साथ वार्ता में, वाणिज्य सचिव ने व्यापार विविधीकरण, आपूर्ति श्रृंखला मज़बूती और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
दोनों पक्षों ने दवाइयाँ, दूरसंचार उपकरण, मशीनरी, चमड़ा, ऑटोमोबाइल एवं रसायन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निर्धारित समयसीमा आधारित रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।
नियामक–से–नियामक त्रैमासिक सहभागिता पर सहमति बनी, जिसके तहत प्रमाणन आवश्यकताओं, कृषि व समुद्री व्यवसायों की सूचीकरण प्रक्रिया, एकाधिकार विरोधी नीतियों और अन्य गैर शुल्क संबंधी मुद्दों को संबोधित किया जाएगा। संवाद में लॉजिस्टिक्स, भुगतान प्रणाली और मानकों से संबंधित व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा की गई, ताकि दोनों देशों के उद्यमों के लिए पूर्वानुमेयता और व्यापार करने में सुगमता बढ़ाई जा सके।
भारत और रूस के वरिष्ठ व्यावसायिक नेताओं की उपस्थिति वाले उद्योगीय पूर्ण सत्र में वाणिज्य सचिव ने कंपनियों को 2030 के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट्स को संरेखित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत की लॉजिस्टिक्स उन्नति, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वस्तुओं एवं सेवाओं में सह-निवेश तथा सह-उत्पादन के अवसरों को रेखांकित किया।
चर्चाओं के दौरान निर्यात उत्पादों के दायरे को व्यापक करने, आपूर्ति श्रंखलाओं में जोखिमों को कम करने, और नियोजित परियोजनाओं को व्यावहारिक अनुबंधों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिससे मूल्य एवं मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके और दोनों देशों के नागरिकों के लिए रोजगार सृजन और दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित हो सके।


