नई दिल्ली। India-America के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप देने से पहले और बातचीत की आवश्यकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका द्वारा दी गई रेसिप्रोकल टैरिफ छूट की डेडलाइन — 1 अगस्त — अब नजदीक है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि भारत के साथ सकारात्मक दिशा में बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए कुछ और चर्चाएं ज़रूरी हैं।
“हम भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। भारतीय पक्ष ने अपने बाजार के कुछ हिस्सों को खोलने में रुचि दिखाई है, लेकिन अभी और चर्चा बाकी है,” – जैमीसन ग्रीर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि
भारत की व्यापार नीति को लेकर अमेरिकी टिप्पणी
ग्रीर ने भारत की पारंपरिक व्यापार नीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की नीतियां वर्षों से घरेलू बाजार की रक्षा पर केंद्रित रही हैं। यह भारत का व्यापारिक दृष्टिकोण है, और अमेरिका इसे समझने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका तैयार है कि बातचीत के जरिए यह जाना जाए कि भारत इस बार कितना आगे बढ़ना चाहता है, और क्या वह एक व्यापक व्यापार समझौते के लिए वास्तव में इच्छुक है।
टैरिफ छूट की समयसीमा: 1 अगस्त
गौरतलब है कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित कई देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी लागू की थी, जिसमें 1 अगस्त तक कोई समझौता न होने पर 35 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, भारत को अब तक ऐसा कोई अंतिम नोटिस नहीं भेजा गया है, जिससे उम्मीद बनी हुई है कि कोई औपचारिक टकराव न हो।
ट्रंप ने कुछ सप्ताह पहले कहा था,
“हम भारत के साथ एक अच्छे समझौते के बहुत करीब हैं। भारत अमेरिकी सामान के लिए अपने बाजार खोलने को तैयार है।”
यह बयान भारत के साथ व्यापार संबंधों में संभावनाएं बनाए रखता है, लेकिन समयसीमा निकट होने से दोनों देशों पर दबाव भी बढ़ा है।
भारत की ओर से क्या संकेत मिले?
भारत की तरफ से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है, और 26 प्रतिशत टैरिफ से बचने के लिए समझौते की दिशा में काम हो रहा है।
वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता अच्छे ढंग से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा,
“मैं यह नहीं कह सकती कि द्विपक्षीय व्यापार अच्छा या बुरा है, लेकिन हम अपने संबंधों को सकारात्मक दिशा में ले जा रहे हैं। यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत अच्छी चल रही है।”
क्या समझौता जल्द होगा?
अमेरिका और भारत दोनों ही इस समय विविध वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिनमें सप्लाई चेन स्थिरता, चीन का बढ़ता प्रभाव और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक स्थिति जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच एक मजबूत व्यापार समझौता राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम हो सकता है।
भारत के लिए यह समझौता न केवल अमेरिका के बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा, बल्कि निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भी संभावनाएं खोलेगा। वहीं, अमेरिका को भारत में एक बड़ा उपभोक्ता बाजार और रणनीतिक सहयोगी मिलेगा।
हालांकि, जैमीसन ग्रीर के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्षों को समझौते के बिंदुओं पर अब भी सावधानीपूर्वक बातचीत करनी होगी, खासकर भारत की घरेलू नीति प्राथमिकताओं को देखते हुए।
समय कम, विकल्प सीमित
भारत और अमेरिका के बीच मजबूत द्विपक्षीय व्यापार संबंध दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, लेकिन टैरिफ छूट की समयसीमा तेजी से पास आ रही है। इस समय बातचीत तेज करने की आवश्यकता है ताकि कोई आर्थिक झटका या टकराव टाला जा सके।
यदि दोनों देश जल्द किसी साझा मंच पर आकर स्पष्ट व्यापार समझौते पर पहुंचते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार संतुलन के लिए भी एक सकारात्मक संकेत हो सकता है.