अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ऐलानों और वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं का असर अब भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखने लगा है। शुक्रवार, 11 जुलाई 2025 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 85.85 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले तीन दिनों की मजबूती को तोड़ता है।
ट्रंप के टैरिफ बयानों का असर
डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि उनका इरादा अमेरिका के व्यापारिक साझीदार देशों पर 15 से 20 प्रतिशत तक ब्लैंकेट टैरिफ लगाने का है। इससे पहले वह ब्राजील पर 50 प्रतिशत और कनाडा पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर चुके हैं।
ट्रंप ने कनाडा को चेतावनी भी दी है कि अगर उसने जवाबी कार्रवाई की, तो अमेरिका और भी ऊंचे टैरिफ लागू करेगा। ऐसे बयानों ने न केवल वैश्विक व्यापार बाजार में हलचल मचा दी है, बल्कि भारत जैसे उभरते देशों की मुद्राओं पर भी दबाव डाला है।
रुपये में आई गिरावट
शुक्रवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 85.85 प्रति डॉलर पर खुला। यह लगातार तीन दिनों की मजबूती के बाद आई गिरावट है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ट्रंप की धमकियों के साथ-साथ वैश्विक बाजार में छाई अस्थिरता के कारण आई है।
वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से अब तक रुपये में 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
पिछले तीन दिनों में रुपये की स्थिति
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बुधवार, 9 जुलाई को रुपया 85.73 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ था।
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गुरुवार, 10 जुलाई को हल्की मजबूती दिखाते हुए रुपया 85.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिसमें 3 पैसे की बढ़त देखी गई थी। दिन भर यह 85.53 से 85.70 के दायरे में कारोबार करता रहा।
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शुक्रवार, 11 जुलाई को रुपये की शुरुआत कमजोर रही और यह 17 पैसे गिरकर 85.85 प्रति डॉलर पर आ गया।
बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार के जानकारों के अनुसार, ट्रंप की टैरिफ रणनीति से वैश्विक निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।
भारत में विदेशी निवेशकों का विश्वास डॉलर की मजबूती और अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियों के चलते प्रभावित हुआ है।
इसके साथ ही, एशियाई शेयर बाजारों और विदेशी मुद्रा बाजारों में कोई ठोस एक्शन नहीं देखा गया, जिससे रुपया और दबाव में आ गया।
क्या आगे और कमजोर हो सकता है रुपया?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि ट्रंप की टैरिफ रणनीति और कड़ी होती है, तो यह वैश्विक व्यापार युद्ध को हवा दे सकती है। इसका असर भारत के आयात-निर्यात और निवेश प्रवाह पर भी पड़ेगा।
इसके चलते भारतीय रुपया अगले कुछ सप्ताहों में और कमजोर होकर 86.20 से 86.50 प्रति डॉलर तक जा सकता है।
हालांकि, अगर भारत और अमेरिका के बीच किसी व्यापारिक समझौते की खबरें आती हैं, तो यह रुपये को राहत दे सकती है।
ट्रंप की टैरिफ नीति: एक नजर
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ब्राजील पर टैरिफ: 50% तक
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कनाडा पर टैरिफ: 35% घोषित
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ब्लैंकेट टैरिफ प्रस्ताव: 15% से 20% तक
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चेतावनी: जवाबी कार्रवाई पर और अधिक दरें लगाने की धमकी
इन सब बयानों ने डॉलर को और मजबूत किया है, जिससे अन्य करेंसीज़ पर नकारात्मक असर पड़ा है।